प्रपंच और चापलूसी
१- प्रपंच का भी आज आधुनिकरण हो गया है
इसलिए चौपाल छोड़ नेट-ग्रुप में हो गया है,
यहाँ पर भी है अँधेर नगरी का चौपट राजा,
टके सेर भाजी और टके सेर खाजा हो गया है।
२- प्रणाम और चापलूसी कर प्रशंसा पा लेते हैं,
खुद को महाकवि मान अनुशंसा कर लेते हैं,
कूपमण्ड...
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ramadwivedi
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[26 Nov 2009 12:06 PM]



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