मोक्ष
वो तुम्हारे अपने नहीं थे जिन्हें साथ लेकर तुमने सपने सजाये सूरज मिलते सब अपनी रौशनी के आगे एक रेखा खींच ही देते हैं ! शिकायत का क्या मूल्य या इन उदासियों का ? 'आह' कौन सुनता है ? वक्त ही नहीं ! गर्व करो- तुम आज अकेले हो ! साथ है वह सत्य जिसे कटु मान...
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रश्मि प्रभा...
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[26 Nov 2009 11:13 AM]



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