अब तो हम कुछ करके ही रहेंगें.....:)
पिछले दो एक दिनों पहले की बात है कि जब एक रात हम अपनी मित्र मंडली के साथ किसी गूढ वार्तालाप में व्यस्त थे । खैर उस वार्तालाप का तो कोई निष्कर्ष नहीं निकला लेकिन बैठे बैठे हमारे मन में जरूर एक प्रेरणा सी जग उठी---कि चलें अपनी बीती जिन्दगी का कुछ लेखा...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[26 Nov 2009 09:14 AM]



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