उदास रात में झींगुरों का करुण राग

KISHORE CHOUDHARY झींगुर सन्नाटे को तोड़ते थे और बुनते भी थे. ये उसके भीतर के शोर की लय में विघ्न उत्पन्न किया करते थे. उनसे ऊब कम और चिढ़ अधिक हुआ करती थी. चिन-चिन की इस आवाज़ को बंद करने के लिये वह अपने कानों पर हाथ रखती फ़िर उन्हें तकिये से दबा देती. इसके बाद भी जब भीत... [पूरी पोस्ट]
writer Kishore Choudhary
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[26 Nov 2009 08:10 AM]

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