बार बार सजग होने का पैगाम

dikhsa दीक्षा Anand rai आनन्द राय, गोरखपुर आज २६ तारीख है. देश की छाती पर आतंकियों ने इसी तारीख को पिछले साल ऐसा जख्म दिया जिसके घाव अभी तक हरे हैं. यह एक ऐसी विडंबना है जिस पर न तो आंसू बहा सकते और न ही अपने गम को छुपा सकते. यह भारत की बुलंद तस्वीर को बचाए रखने की गाथा भर... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द राय
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[26 Nov 2009 03:27 AM]

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