विचलित मन

गठरी अब अपने नन्हें-बच्चों को पाठ विनम्रता का न पढ़ाना ! आने वाले कल की ख़ातिर सत्य -अहिंसा नहीं सिखाना !! जब नेता हों चोर -उचक्के ऐसे मंज़र रोज़ ही होंगे, अपनों में गद्दार छुपे हों दिल पर खंज़र रोज़ ही होंगे ! रोज़ ही होगा देश में मातम,ख़ूँ के समन्दर रोज़ ही होंग... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार
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[26 Nov 2009 03:20 AM]

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