बंधे हुए लफ्ज़ ....

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** आतंक के हाथ क़ानून से ज्यादा लंबे हैं जो ख़ास सुरक्षा मिलने पर भी मौका मिलते ही धमाका कर जाते हैं और लिखने वाले के हाथ अभी भी बंधे हैं जो आजाद होते हुए भी इंसानो से ड़र जाते हैं !! 2:) सुनो , आज कुछ लफ्ज़ दे दो मुझे ना जाने मेरी कविता के सब मायने ...... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[26 Nov 2009 02:52 AM]

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