धरती के फूल

तृषा'कान्त' धरती के फूल उग आए हैं इस बार.... राजनीति की आँधी, और आतंक की बेमौसम 'मुंबई बरसात' से होती हैं जड़ें बहुत गहरी सुना है पाताल तक ... धरती के फूल की कंक्रीट के जंगल में पांचसितारा संस्कृति में परोसे जाने वाले व्यंजन ने फैला दी है अपनी खेत खलिहान ... विल... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
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[26 Nov 2009 01:31 AM]

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