मुरली तेरा मुरलीधर 36

अखिलं मधुरम् कोना कोना प्रियतम का जाना पहचाना है मधुकर इठलाता अटपटा विविध विधि आ दुलरा जाता निर्झर शब्द रूप रस स्पर्श गन्ध की मृदुला बाँहों में कस कस टेर रहा है अनन्तआस्वादा मुरली तेरा मुरलीधर।।196।। हिला हिला दूर्वादल अंगुलि बुला रहा तुमको मधुकर पर्वत पर्वत शिखर... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[25 Nov 2009 23:31 PM]

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