भारत और आतंकवाद - क्षमादान अब त्यागो

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh कभी घुसपैठ कभी जेहाद और आतंकवादलगे हैं सबके सब करने भारत को बरबादभारत को बरबाद रोज हो रहा ख़ूनी खेलढुलमुल विदेश नीति की देखो रेलमपेल हमे बचाया मेजर संदीप ने देकर अपनी जान करकरे, काम्टे, शर्मा और कितने वीर जवान कितने वीर जवान अभी और शहीद कहलायेंगे क्या... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ सतरंगी

hindi kavita

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[25 Nov 2009 21:39 PM]

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