अज़ीज़-अज़-जान लड़की

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति पेड़, पौधे, पत्तियाँ, फूल, खुले लम्बे दूर तक फैले खेत कहीं बहुत पीछे छूटते जा रहे हैं. खुले मैदानों में खेलते बच्चे, पल्लू को मुंह में दबाएँ मुस्कुराती वे स्त्रियाँ, बैलगाड़ी, खिली धूप ये सब एक एक करके पीछे छूट गए हैं. मैं तुमसे आखिरी विदा लेने के बा... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
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[25 Nov 2009 12:55 PM]

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