इतना भी आसान नहीं

मुस्कुराते पल-कुछ सच कुछ सपने व्यस्तता के दौर से निकली सरल और सहज शब्दों में साकार, ग़ज़ल की कुछ लाइनें आप सब के नज़र करता हूँ..आशीर्वाद दीजिएगा. सोच रहा था तुमसे मिलता,पर आना आसान नहीं, फुरसत के कितने पल है,यह समझाना आसान नहीं, हैरत में हूँ,मैं यह सुनकर,की मैं बदल गया हूँ अब, मज... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद कुमार पांडेय
views
32
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
18
[25 Nov 2009 11:24 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix