मेरी तनहाइयों

कीबोर्ड के सिपाही पिछले दिनों मनीष भाई ने ख़ूबसूरती से मेरे पसंदीदा शायर मजाज़ लखनवी का ज़िक्र छेडा और उनकी बेहद मक़बूल नज़्म आवारा पेश की. इसे पढ़कर अपन माज़ी के पन्ने पलटने लगे और यादों की किताब का पन्ना मुड़ा हुआ था.. वहां देखा.. प्रेम वरबर्तोनी मुझसे पूछ रहे हैं क... [पूरी पोस्ट]
writer neerajdiwan

दिल से

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[08 Dec 2006 14:30 PM]

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