नींद को
जब स्वप्नदृष्टा दुनिया मसरूफ होती है स्वप्नों की और स्वप्नों सी रंगीनियों में , तब देखकर मैं पल-पल गुजरता वक़्त , इंतज़ार किया करता हूँ तुम्हारे आगमन का | जानता हूँ,तुम नहीं आओगी और न ही बुलाओगी , इसीलिये सुनने लगता हूँ तुम्हारे लिए सुरक्षित रखा मोजार...
[पूरी पोस्ट]
धीर.
20
0
0
0
0
[25 Nov 2009 05:53 AM]



Shuffle








