पर आंसू किसका गिरा, आह किसने की , आत्मा ने ही तो की?

कुछ सोंचा कुछ बाक़ी है आज मन अधीर है । चिंतित है । वह मन जो आज कई दिनों से स्वयं में उल्लासित था आज उसकी ये दशा है मैं स्वयं नहीं कह सकता की आख़िर ऐसा क्यों है । क्यों आज यह स्थिर है , जडवत है , वेग नहीं है , गति नहीं है , थका हारा दंडवत है ? क्या इसे किसी ने कुछ कहा या फ़ि... [पूरी पोस्ट]
writer anilpandey
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[25 Nov 2009 05:46 AM]

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