डेंगू परिवार जाली के उस पार

व्यंग्य प्रमोद ताम्बट दूसरे प्रहर में अचानक मेरी नींद किसी के पुकारने की आवाज से खुली तो देखा कि खिड़की की मच्छर जाली पर एक मच्छर परिवार बदहवास सा मुझे पुकार रहा है-ताम्बट साहब, ओ ताम्बट साहब ! मैंने झल्लाते हुए पूछा - क्या है ! क्यों इतनी रात को नींद खराब कर... [पूरी पोस्ट]
writer vyangya

व्यंग्य

views
25
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
20
[24 Nov 2009 23:20 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix