आज कैसे कर रहे हैं देखो हम करम....

दिशाएं बस उम्मीदों के साये मे जी रहे हम। आज अपना ही लहू पी रहे हैं हम। कौन हमको हमसे बचाएगा यहाँ आज, होठ सच के मिल यहाँ, सी रहे हैं हम। घुट घुट के निकल रहा आज अपना दम। आज कैसे कर रहे हैं देखो हम करम। प्यार पैसा बन गया हर नजर में आज। रिश्ते पैसों से बनें , क... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली

परमजीत बाली

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[24 Nov 2009 19:47 PM]

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