हाय क्या थे वो दिन फ़ाका-मस्ती के !!

जीवन के पदचिन्ह हाय क्या थे वो दिन फ़ाका-मस्ती के !!  जब एक कट-चाय समोसे से, हम यह दुनिया नापा करते थे, एक ख्याली धागे के दम पर, हम  हर सिस्टम बांधा करते थे यूँ तो हर बात फलसफे पर होती थी एक हम ही ज्ञानी-विज्ञानी थे  ... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

चिंतन

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[24 Nov 2009 14:22 PM]

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