भाषा में छिपे हुए भाव

अनौपचारिक बडा कौतूहल होता है देखकर जब प्‍यार और नफरत उपेक्षा और अपनत्‍व अस्‍वीकार और सहानभूति की भाषा बेजुबान पशु पक्षी और अबोध नवजात भी समझ जाते हैं , तत्‍क्षण | वे भी, जिनका भाषा और सभ्‍यता से कोई सरोकार नहीं होता | वे भी, जिन्‍हें इनकी आदत पड गई है सदियों स... [पूरी पोस्ट]
writer अर्कजेश
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[24 Nov 2009 12:39 PM]

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