तेरी दुनिया के निराले, दस्तूर हैं...
पता नहीं क्या लिखा है, बस दिल में आया ओर लिख दिया.. अगर कुछ उल्टा-पुल्टा हो कृपया बेझिझक बताइयेगा..जिससे की मैं सुधार सकूँ... स्नेह मीत तेरी दुनिया के निराले, दस्तूर हैं... ग़मज़दा चेहरों पे ये कैसा, नूर है... खा रहा है गालियाँ, बदन...
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मीत
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[24 Nov 2009 07:21 AM]



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