घर आपका टूटा नहीं होता ---गज़ल
उसको अगर परखा नहीं होता सखा घर आपका टूटा नहीं होता सखा मैने तुझे देखा नहीं होता सखा फिर चाँद का धोखा नहीं होता सखा हर रोज ही तो है सफर करता मगर सूरज कभी बूढ़ा नहीं होता सखा इजहार है इक दोस्ताना प्यार तो इसका कभी सौदा नहीं होता सखा उगने की खातिर धूप भी...
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श्याम सखा 'श्याम'
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[24 Nov 2009 05:11 AM]



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