एक माँ जैसी कलम
एक माँ जैसी है मेरी ये कलम, पालती है मेरे शब्दों को अपनी कोख में, वहीं उन्हे सीँचती है जाने कितने ही भावों से, और फिर जन्म देती है किसी गीत, किसी कविता को, जब भी रोते बिलखते हैं मेरे गीत, उन्हें कागज़ की कोरी सेज पर थपकियाँ देकर सुलाती है, उन्हे भेज द...
[पूरी पोस्ट]
Gurnam Singh Sodhi
21
2
0
2
6
[24 Nov 2009 00:11 AM]



Shuffle








