बंद भी खुला भी !

कुछ लोग... कुछ बातें... ! टोपोलोजी की बात शुरू होने के पहले बंद हो गयी. बात प्रस्तावना से आगे बढ़ी ही नहीं. 'शुरू होने से पहले ही बंद...? !' अब बात थी टोपोलोजी की तो ऐसा ही होना था. इससे याद आया एक उदहारण जो उस किताब में है जिसने हमारा और टोपोलोजी का पहला परिचय कराया. जेम्स मु... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक ओझा

Hindi

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[23 Nov 2009 18:21 PM]

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