ठिठुरती यादों की गुनगुनी परछाईंयां

ख्वाहिशें ऐसी अपनी ही सांसों से फंूक मारक हथेलियों को गर्म करने की कोशिश। नाक में जलती हुई लकडिय़ों का धुंआ घुस रहा है। चूल्हे के पास यूं बैठने को तीन चार लोगों की ही जगह दिखती है लेकिन 'थोड़ा और आगे सरक।Ó कहते हुए रसोई के चूल्हे के पास दस लोग जमा हो गए। चाचा दूलसि... [पूरी पोस्ट]
writer ramkumar singh
views
21
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
3
[23 Nov 2009 08:27 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix