हकीकत में न ले चलो दोस्तों...
मुझे हकीकत में न ले चलो दोस्तों, बस इक बार कहूँगा बेगुनाह हूँ दोस्तों| कदम पहले बढ़ाने की कोशिश की हर सफ़र में ठहर गया तूफानों से रास्ते जब बदल गए दोस्तों| हर हाथ सहारे को बढतें रहे हर पल गलत थे जो उसको उधार कह गए दोस्तों| चोट खाकर...
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लोकेन्द्र
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[23 Nov 2009 08:11 AM]



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