जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं...
जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं पतझड़ों में हम सावन की राह तक़ते हैं अनसुनी चीखों का शोर हैं यहाँ हर तरफ़ गूंगे स्वरों से नगमे सुनने की बात करते हैं जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं ..... बाँट गयी है यह ज़िंदगी यहाँ कई टुकड़ों में टूटते सप...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[23 Nov 2009 02:14 AM]



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