श्रीमद्भागवद्गीता से ......................

एक प्रयास श्रीमद्भागवद्गीता के ७ वें अध्याय के २४ वें श्लोक की व्याख्या स्वामी रामसुखदास जी ने कुछ इस प्रकार की है जिससे परमात्मा के साकार और निराकार स्वरुप की सार्थकता समझ आती है । श्लोक बुद्धिहीन मनुष्य मेरे सर्वश्रेष्ठ परमभाव को न जानते हुए अव्यक्त (मन - इन... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[23 Nov 2009 01:55 AM]

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