किताबों की दुनिया - 19

नीरज ऐ खुदा रेत के सेहरा को समन्दर कर दे या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे तुझको देखा नहीं मेहसूस किया है मैंने आ किसी दिन मेरे एहसास को पैकर* कर दे पैकर* = आकृति और कुछ भी मुझे दरकार नहीं है लेकिन मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर कर दे बरसों से जब भी जगज... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज गोस्वामी
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[22 Nov 2009 23:47 PM]

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