सितारे डूबते सूरज से क्या सामान लेते हैं
सोचा, बहुत दिन हो गये आपलोगों को अपनी ग़ज़ल से बोर किये हुये। तो आज एक ग़ज़ल- एकदम नयी ताजी। जमीन अता़ की है फ़िराक़ गोरखपुरी साब ने...." बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं/तुझे ए ज़िन्दगी, हम दूर से पहचान लेते हैं "...सुना ही होगा आपसब ने?...तो इस...
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गौतम राजरिशी
ग़ज़ल
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[22 Nov 2009 19:57 PM]



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