रोटी-पानी-बिजली-सड़क चाहिये, या पेशाब के बाद सुखाने के लिये ढेलों पर सब्सिडी ? (वहाबी आंदोलन के बहाने)

मैनें आहुति बनकर देखा.. कल के ‘द हिन्दू’ में एक लेख पढ़ा। प्रसिद्ध विधिवेत्ता राम जेठमलानी ने नई दिल्ली में आतंकवाद पर हुए कानूनवेत्ताओं के एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘वहाबी आन्दोलन’ और उग्रवाद में तार जोड़ने की कोशिश क्या की, सउदी राजदूत फैसल-अल-तराद ऐंठकर वॉकआउट कर गये... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)

आतंकवाद

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[22 Nov 2009 18:39 PM]

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