रविवारी चर्चा , दो लाइन का खर्चा ..
सोचा तो ये था कि आज रविवार होने के कारण पूरा फ़ायदा उठाते हुए ,खूब ब्लोग पढाई और टिपाई हो जाएगी ...बीच बीच में समय बचा तो पोस्ट भी ठेल लेंगे ...मगर सुबह से ही बिटिया बुलबुल बुखार में तप रही थी ॥बस सुबह से ही उसे गोद में लिये बैठे रहे ...डाक्टर साहब से...
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अजय कुमार झा
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[22 Nov 2009 12:50 PM]



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