लगत जोबनवा मा चोट को खोजती एक फिल्म

नई सोच लगत जोबनुवा में चोट, फूल गेंदवा न मार। ये शब्द फिर गाये नहीं गये। ठुमरी के ये बोल कहीं खो गये होते।शब्द ही थे। खो जाते। अगर सबा उन्हें ढ़ूढ़ने की कोशिश नहीं करती। लेकिन सबा दीवान को न जाने क्या सूझी कि वो इन शब्दों को ढ़ूढ़ते ढूंढ़ते एक सिनेमाई सफर त... [पूरी पोस्ट]
writer उमेश पंत

फिल्मों पर

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[22 Nov 2009 10:03 AM]

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