बाजार से डरना मना है

अस्तित्व आज बाजार के साथ वाद शब्द जुड़कर एक बिल्कुल ही नये अर्थ में प्रयुक्त होने लगा है । बाजारवाद शब्द में जिस दार्शनिक गंभीरता का पुट होना चाहिये , वह नदारत है । मुझे बाजारवाद के पक्ष में खड़ा कोई नहीं दिखता । सब के सब बिपक्ष में हैं । प्रजातन्त्र के इस युग... [पूरी पोस्ट]
writer सुरेश पण्डा
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[04 Oct 2009 03:19 AM]

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