दीपक को जलने दो

अस्तित्व द्वार पर धरा दीपक भोर तलक जलने दो । सूरज ने कैद किया विद्रोही चाँद लुकछिप कर भागा है शुक्र बाढ़ फाँद तारों ने टाँक दिये चमकीले बूटे क्षितिज के पार नहीं ज्योति पिंड छूटे जुगनू का संगी बन अंधियारा हरने दो दीपक को जलने दो । यौवन में रंग भरे मंगल की चाल म... [पूरी पोस्ट]
writer सुरेश पण्डा
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[17 Oct 2009 03:52 AM]

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