तुम ईद मना लो तनहा तनहा हम रो लेंगे तनहा ही
मेरी पलकों पर जो सपने थे पल भर में चकनाचूर हुए क्या ख़बर सुनाई ज़ालिम ने और हम ग़म से रनजूर हुए क्या सोचा था इस बार अगर हम उनसे मिलने जाएंगे हर वक्त हमारे साथ रहें कुछ ऐसे लम्हे लाएंगे पर ख़ता हमारी थी शायद जो सपना पूरा हो न सका क्या ख़बर सुनाई ज़ालि...
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Razi Shahab
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[22 Nov 2009 07:12 AM]



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