आज भी कंपा जाती है वह रात... (श्रद्धांजलि लेख मृतकों के नाम)
ठीक एक साल पहले, २६ नवंबर की रात ११ बजे काम के बाद घर को विदा होने को थे। शांत रात, सर्द मौसम और सिकुड़ता देह बता रहा था कि शरीर कंबल की गरमी पाने को बेचैन है। तभी न्यूज चैनल पर मुंबई में गोली चलने की आवाज सुनाई पड़ी थी। बस यूं ही उत्सुकता बस मुरिया...
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प्रभात गोपाल झा
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[22 Nov 2009 07:10 AM]



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