शब्द ....... [कविता] - श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
भाषा एवं श्ब्दों को लेकर आज न जाने कितना ववाल राज ठाकरे जैसे नेता मचा रहे हैं .. ऎसे में तृषाकान्त के मंच प्रथम पोस्ट ’शब्द’ का स्मरण स्वाभाविक हो जाता है... ] शब्द लिफाफे हैं खोल कर पढ़ो छोडक़र नाव को, घाट से आगे बढो, कोष शब्दों का पुराना है बहुत, भ...
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श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
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[22 Nov 2009 02:32 AM]



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