पिघला दें ना ह्रदय तुम्हारा
प्रस्तुत है कई वर्ष पहले लिखी एक रचना. जो मुझ बहुत पसंद है , शायद आपको भी पसंद आये. पिघला दें ना ह्रदय तुम्हारा .. पिघला दें ना ह्रदय तुम्हारा , जब तक मेरे नगमे गीत तब तक चैन नहीं पाऊंगा, मेरे रूठे बिछुड़े मीत पिघला दें ना ह्रदय तुम्हारा तुम्ह...
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योगेश स्वप्न
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[21 Nov 2009 23:17 PM]



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