हर धर्म का मर्म तो एक ही है !
आज हर कोई "अपने' धर्म की ध्वजा को ऊँची से ऊँची उठाने की "जुगाड़' में लगा दिखता है। इस बनावटी उड़ान में धर्म का असल और सार्थक-सहज संदेश बुरी तरह से अपनों ही के पैरों तले दबा-कुचला जाता है। धर्म के कुरूक्षेत्र में सबके पास स्वार्थ भरे बयानों के तीर और तल...
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नरहरि पटेल
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[21 Nov 2009 22:07 PM]



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