हम सभी खानाबदोश है...
हम में से ऐसे कितने लोग हैं जो अपनी जड़ों से उखड़कर नई जगहों पर जमने की कोशिश कर रहे हैं ..। खानाबदोशों की तरह हमारे पूर्वज जाने कहाँ से भटकते हुए आये और कहीं किसी जगह पर स्थायी हो गये । फिर उस पीढ़ी से कुछ लोग निकले रोजी-रोटी की तलाश में और नई जग...
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शरद कोकास
आन्दोलन
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[21 Nov 2009 17:01 PM]



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