जरा बेचूक हो पीना कि ये रिश्तों का पानी है
काफी दिनों से बाहर होने से ब्लॉग जगत से दूर रहा।गुवाहाटी और कोलकता की लम्बी यात्रा और कई मधुर संस्मरण मन में इस तरह से समाये है कि कुछ करने का जी नहीं कर रहा है.वापस आया तो हफ्ते भर के सारे बकाया काम मेरा इन्तजार कर रहे थे. ब्लॉग जगत के सारे मित्रो स...
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प्रकाश पाखी
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[21 Nov 2009 08:28 AM]



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