ऐसे काले सर्पों का सन्यास ज़रूरी है

भारतीयम Bhaarateeyam दीवारों से टकराने का अभ्यास ज़रूरी है पत्थर को पिघलाने का प्रयास ज़रूरी है. धार नदी की मुड़ सकती है, बस दो हाथों से अपने हाथों पर ऐसा विश्वास ज़रूरी है. तृप्त नहीं होती जो मंज़िल को पा जाने तक़ मंज़िल के हर राही को वह प्यास ज़रूरी है. बीच सफर से जो मुड़ जाये... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
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[21 Nov 2009 05:43 AM]

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