सतीश श्रोत्रिय की मालवी ग़ज़ल

मालवी जाजम......बोलोगा तो बचेगी मालवी वी दूध रो दूध ने पाणी सो पाणी करे हे वणाती(उनसे) अणी वाते,हगरा(सभी)मनक(मनुष्य)डरे हे गरीब लोगाँरी हालत तो घणी खराब हे वी रोज कूडो(कुँआ)खोदे,रोज पाणी पिये हे गूँगा,बेरा ने चालवाती(चलने से)मोताज झाडका(पेड़) पाणी वना(बिना)हूकी ने (सूख कर)वणा रा पाना झड़े... [पूरी पोस्ट]
writer मालवी जाजम
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[21 Nov 2009 02:48 AM]

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