कुछ भी नहीं पूछा है उसने
परछाइयों से लड़ बैठी हूँ अब कोई मुझे बुलाये न कुछ भी नहीं पूछा है तुमने ये कोई मुझे बताये न दरिया तो पार किया मैंने अब साहिल पे अटकाये न पतवारें तो होती बहाना हैं दम अपना कोई भुलाये न नहीं पछाड़ा मुझको दरिया ने किनारे से कोई लडाये न हाय कोई ढाल बनी ह...
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शारदा अरोरा
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[21 Nov 2009 01:59 AM]



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