१० दिन के लिए अर्धविराम....!

अस्तित्व मावठा रूका तो....धूप का हाथ पकड़कर गहरी खुनक साथ चली आई...तब से धूप और खुनक दिन भर आँख मिचौली खेलती रहती हैं और शाम होते-होते धूप तो थक कर घर चली जाती है, लेकिन खुनक रात होते ही जवान हो जाती है....। मन रूखा-रूखा बना हुआ है, कितनी ही कोशिश की उसे मनान... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. अमिता नीरव
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[21 Nov 2009 01:57 AM]

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