हमारे सपने उनके सपने

अक्षरछाया हमें अब सपने नहीं आते हैं हमारे पास रात नही है हमारी रातें खरीदकर वे अपने सपने पूरे करते हैं सुबह हमारे लिए शाम बनकर आती है दिन ही हमारी रात होती है और दिन के सपने कब पूरे होते हैं... [पूरी पोस्ट]
writer Narendra Kumar
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[21 Nov 2009 01:20 AM]

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