हमारी अपनी ज़बान की साठवीं बरसी

वेबलाग पर... हमारी हिंदी, जिसे हम इतना प्यार करते हैं अपंग है, वह जन्म से विकलांग नहीं थी लेकिन उसका अंग-भंग कर दिया गया. वह बहुत बड़ी सियासत का शिकार हुई, अभी वह बड़ी हो ही रही थी कि 1947 में उसके हाथ-पैर काटके उसे भीख माँगने के लिए बिठा दिया गया. करोड़ों लोगों... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार

साथियों की कलम

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[30 Aug 2009 15:41 PM]

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