भिखारी और लिपस्टिक
कल डा० अनुराग की पोस्ट ने कुछ समय तक अशाँत रखा। मेरे ख़्याल से यह कथ्य कोलाज़ समाज के विस्तृत कैनवास के चित्रण का एक फ़ैशनेबुल रिपीटेशन था, जो एक कोने पर ही टिक कर रह गया है । कुश के स्वर में निहित प्रतिवाद और अनूप शुक्ल की प्रशँसात्मक उलाहना से जैसे मु...
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डा. अमर कुमार
साथियों की कलम
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[02 Sep 2009 18:15 PM]



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