त्रिवेणी

Tarun's World तेरे रिश्ते को कब का दफ़न कर आया हूँ फिर भी तेरा एहसास है कि जाता नहीं रिश्तो कि भी शायद कोई रूह होती होगी                 ***** तेरी हर एक याद को दरियां में बहा आया हूँ तेरी हर आहट को ख़ामोशी मे... [पूरी पोस्ट]
writer tarun
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[20 Nov 2009 13:56 PM]

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