प्रेम मिलन

dr ashok priyaranjan डॉ. अशोक प्रियरंजन भौतिक सुख पाने का माध्यम होता है शरीर । नहीं फूटती इसमें शाश्वत और अनंत नेह की कालजयी कोंपल । जन्म जन्म तक जलने वाली प्रेम की अमर ज्योति जन्म लेती है आत्मा से । शरीर बंधा रहता है जाति उम्र और सौंदर्य के खोखले बंधन में । जकड़ा रहता... [पूरी पोस्ट]
writer dr. ashok priyaranjan
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[20 Nov 2009 13:19 PM]

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